मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कोर्स (Diploma in Medical Electronics) कैसे करें पूरी जानकारी

नमस्कार! आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कोर्स (diploma in medical electronics) कैसे करें पूरी जानकारी। यह फील्ड ऐसे छात्रों के लिए बहुत अच्छी है जो 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय की पढ़ाई करते हैं। इस क्षेत्र में जहां बेहतरीन कैरियर के ऑप्शन मिलते हैं तो दूसरी ओर हर महीने कैंडिडेट को एक अच्छा वेतनमान भी मिलता है। इसी कारण आज बहुत से साइंस स्टूडेंट्स इस फील्ड में अपना कैरियर बनाना पसंद करते हैं। अगर आप भी एक ऐसे छात्र हैं जो मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं तो हमारे आज के इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें और जानें कि 12वीं के बाद इस इंडस्ट्री में आप किस प्रकार से अपना एक शानदार कैरियर बना सकते हैं। 

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मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स क्या है (What is diploma in medical electronics in Hindi)

यहां आपको सबसे पहले जानकारी के लिए बता दें कि मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स का डिप्लोमा एक ऐसा कोर्स है जिसमें कैंडिडेट को सिखाया जाता है कि किस प्रकार से मेडिकल डिवाइस बनाए जा सकते हैं। बता दें कि इसके अंतर्गत ऐसे डिवाइसिस कैंडिडेट को बनाने सिखाए जाते हैं जो मेडिकल और हेल्थ रिलेटेड प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में सक्षम हों। जानकारी दे दें कि बहुत से लोगों को आर्टिफिशियल ऑर्गन की आवश्यकता होती है क्योंकि एक्सीडेंट होने की वजह से  या जन्म से ही उनका कोई बॉडी पार्ट मिसिंग होता है। ऐसे में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के अंतर्गत छात्रों को आर्टिफिशियल डिवाइसेज और आर्टिफिशियल बॉडी पार्ट्स भी बनाने सिखाए जाते हैं। साथ ही बताते चलें कि जितने भी इक्विपमेंट्स डॉक्टरों को ऑपरेशन या सर्जरी करने के लिए चाहिए होते हैं उन सभी को मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर ही बनाते हैं। 

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अवधि (duration) 

अब यहां आपको जानकारी के लिए बता दें कि मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स की अवधि 3 साल की होती है। इस प्रकार 3 साल बाद कैंडिडेट मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में एक्सपर्ट हो जाते हैं जिसके बाद वो इस इंडस्ट्री में काम कर सकते हैं।

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा (Entrance test for diploma in medical electronics course)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के लिए हमारे देश के कुछ कॉलेजों में एंट्रेंस एग्जाम रखा गया है जिसको पास करने के बाद ही छात्रों को दाखिला मिलता है। तो वहीं भारत में कुछ ऐसे इंस्टिट्यूट्स भी हैं जहां पर कैंडिडेट बिना प्रवेश परीक्षा के इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। यहां आपको बताते चलें कि यह स्टूडेंट्स के ऊपर डिपेंड करता है कि वह कौन से कॉलेज में एडमिशन लेना चाहते हैं। अगर वह किसी प्रतिष्ठित या बड़े कॉलेज से इस कोर्स को करने का इच्छुक है तो तब उनको एंट्रेंस एग्जाम में भाग लेना होगा। 

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया क्या है (What is the admission process for diploma in medical electronics course)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के लिए सबसे पहले कैंडिडेट को साइंस जैसे विषय के साथ 12वीं कक्षा पास करनी होती है। उसके बाद कैंडिडेट को यह निर्णय करना होता है कि उसे कौन से कॉलेज से इस कोर्स की पढ़ाई करनी है। बता दें कि हर साल विभिन्न संस्थानों और कॉलेजों में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के डिप्लोमा के लिए एडमिशन ओपन होते हैं जहां पर कैंडिडेट अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। साथ ही बताते चलें कि अगर किसी कॉलेज में एंट्रेंस टेस्ट की प्रक्रिया है तो छात्रों को उसको क्लियर करने के बाद ही इस पाठ्यक्रम में दाखिला मिलता है। इसलिए स्टूडेंट्स को चाहिए कि वह अच्छी तरह से सोच विचार कर ही अपने कॉलेज या संस्थान का चयन करें। 

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मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए (What should be the qualification for diploma in medical electronics course)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स का यह कोर्स करने के लिए किसी भी छात्र के अंदर कुछ योग्यताओं का होना जरूरी है जोकि इस प्रकार से हैं – 

  • इच्छुक छात्र ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम विज्ञान विषय में 12वीं कक्षा पास की होनी चाहिए।
  • 12वीं कक्षा में छात्र के कम से कम 50% अंक होने जरूरी हैं।
  • छात्र को अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ कंप्यूटर का ज्ञान भी होना चाहिए। 

फीस (fees)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स डिप्लोमा कोर्स के तहत छात्रों को जो फीस देनी होती है वह सबसे ज्यादा इस बात के ऊपर निर्भर करती है कि उनका कॉलेज प्राइवेट है या फिर गवर्नमेंट। यहां बता दें कि सरकारी कॉलेजों में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स डिप्लोमा कोर्स की फीस 40,000 रुपए से स्टार्ट होती है तो वही निजी कॉलेजों में इसके लिए कैंडिडेट को और भी ज्यादा फीस देनी पड़ती है। इस प्रकार से इस पाठ्यक्रम के लिए छात्रों को 40 हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए तक की फीस देनी पड़ सकती है जो कि हर संस्थान पर अलग-अलग डिपेंड करती है। 

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भारत में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स करने के लिए कॉलेज (College to do medical electronics course in India)

जो छात्र मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स मे डिप्लोमा करना चाहते हैं उन्हें यहां जानकारी के लिए बता देंगे इसके लिए भारत में बहुत सारे कॉलेज हैं जैसे कि – 

  • अंबेडकर पॉलिटेक्निक दिल्ली (Ambedkar polytechnic, Delhi)
  • एडब्ल्यूएच पॉलिटेक्निक कॉलेज कालीकट (AWH Polytechnic College Calicut) 
  • अपूर्व पॉलिटेक्निक परभणी (Apurva Polytechnic Prabhani) 
  • एग्नेल पॉलिटेक्निक गोवा (Agnel Polytechnic Goa)
  • टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई (Tata memorial Hospital Mumbai)
  • पारूल यूनिवर्सिटी वडोदरा (Parul university Vadodara) 
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक मिराज महाराष्ट्र (Government Polytechnic miraj Maharashtra)
  • मॉडल पॉलिटेक्निक कॉलेज केरल (Model Polytechnic College Kerala) 
  • तुरा पॉलिटेक्निक मेघालय (Tura Polytechnic Meghalaya) 
  • छोटू राम रूरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड फार्मेसी दिल्ली (Chhotu Ram Rural Institute of Technology and Pharmacy Delhi) 

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स का पाठ्यक्रम/ सब्जेक्ट्स क्या-क्या है (What are the syllabus / subjects of medical electronics course)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के सिलेबस की अगर आपको जानकारी नहीं है तो यहां निम्नलिखित हम आपको विस्तारपूर्वक बता रहे हैं जो कि इस प्रकार से है – 

  • टेक्निकल मैथमेटिक्स  (Technical mathematics) 
  • प्रोग्रामिंग (Programming) 
  • इंजीनियरिंग फिजिक्स (Engineering physics)
  • प्रिंसिपल्स ऑफ इलेक्ट्रिक सर्किट (Principles of electric circuits) 
  • इलेक्ट्रॉनिक्स वर्कशॉप प्रैक्टिस (Electronics workshop practice) 
  • प्रोफिशिएंसी इन इंग्लिश (Proficiency in English) 
  • इंट्रोडक्शन टू इलेक्ट्रॉनिक्स (Introduction to electronics) 
  • इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर (Engineering software) 
  • डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स (Digital electronics) 
  • मैनेजमेंट फॉर इंजीनियर्स (Management for engineers) 
  • माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स (Microelectronics) 
  • इलेक्ट्रिक सर्किट्स (Electric circuits) 
  • माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स (Microelectronics) 
  • कांबिनेशनल एंड सीक्वेंशियल लॉजिक (Combinational and sequential logic)
  • इंजीनियरिंग डिजाइन  (Engineering design)
  • ह्यूमन एंड कंट्रोल फिजियोलॉजी फॉर इंजीनियर (Human and control physiology for engineers) 
  • इंट्रोडक्शन टू फिजिकल साइंस (Introduction to physical Science) 
  • प्रिंसिपल ऑफ फिजियोलॉजिकल मेजरमेंट (Principle of physiological measurement) 
  • टेक्निकल एंड कम्युनिकेशन इंग्लिश (Technical and communication English)
  • इंट्रोडक्शन टू एंटरप्रेन्योरशिप (introduction to entrepreneurship) 
  • मेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन सिगनल एंड इमेजिंग सिस्टम (medical instrumentation signal and imaging system)
  • बिजनेस मैनेजमेंट टेक्निक्स (business management techniques)
  • इलेक्ट्रॉनिक्स इन थैरेपीयूटिक एंड डायग्नोस्टिक डिवाइसेज (electronics in therapeutic and diagnostic devices) 
  • इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग (Industrial training) 

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स के बाद कैरियर संभावनाएँ क्या है (What are the career prospects after medical electronics course)

जो कैंडिडेट मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स कर लेते हैं उनके सामने कैरियर की बहुत सारी संभावनाएं आती हैं जहां पर वह काम कर सकते हैं जैसे कि –

  • यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस (universities and colleges)
  • पेरेक्सेल इंटरनेशनल बेंगलोर (Parexel international Bangalore)
  • दद्दास मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड पुणे (Daddas medical Private Limited Pune) 
  • अपोलो हॉस्पिटल्स बेंगलोर (Apollo Hospitals Bangalore)
  • असवास क्लिनिक कोटानंदूरु  (Asvas clinics Kotananduru) 
  • ईयोड्ले मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलोर (Eoddley medicals Private Limited Bangalore) 

वेतन (salary)

जब कैंडिडेट मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कर लेते हैं उसके बाद उन्हें जो शुरुआती सैलरी मिलती है वह सबसे पहले उनकी योग्यता और उसके बाद कंपनी के ऊपर डिपेंड करती है कि वह किस कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। वैसे अगर देखा जाए तो इस फील्ड में किसी भी कैंडिडेट को उसके कैरियर की शुरुआत में 20,000 से लेकर 30,000 तक का वेतनमान मिल जाता है जो कि बाद में और भी अधिक हो जाता है। 

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प्राइवेट सेक्टर में जॉब्स (Jobs in private sector after)

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स में डिप्लोमा करने के बाद उम्मीदवारों के सामने प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने के बहुत सारे अवसर होते हैं जो कि इस प्रकार से है –

  • बायोमैटेरियल इंजीनियर (Biomaterial engineer) 
  • बायो मैकेनिकल इंजीनियर (Biomechanical engineer)
  • एसोसिएट प्रोफेसर (Associate professor)
  • बायो इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर (Bioinstrumentation engineer)
  • टेक्निकल राइटर (Technical writer)
  • क्लीनिकल इंजीनियर (Clinical engineer)
  • पेटेंट एनालिस्ट (Patent analyst) 
  • मेडिकल ट्रांसक्रिप्शनिस्ट (Medical transcriptionist)
  • बिजनेस मैनेजर (Business manager)
  • प्रोफेसर (Professor)
  • टीचर (Teacher)
  • रिसर्च साइंटिस्ट (Research scientist) 

गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब्स (Jobs in government sector)

इस इंडस्ट्री में डिप्लोमा हासिल करने के बाद कैंडिडेट को जिस प्रकार प्राइवेट नौकरियां आसानी से मिल जाती है ठीक उसी तरह से उम्मीदवार गवर्नमेंट सेक्टर में भी जॉब्स के मौके पा सकते हैं। यहां बता दें कि संबंधित क्षेत्र में हर साल सरकारी विभागों में नौकरियां निकलती है जहां पर उम्मीदवार अपना आवेदन दे सकते हैं। 

निष्कर्ष

दोस्तों यह था हमारा आज का आर्टिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कोर्स (Diploma in Medical Electronics) कैसे करें पूरी जानकारी। इस लेख में हमने आपको बताया कि मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स डिप्लोमा कोर्स क्या है और इस कोर्स की अवधि कितनी होती है। इसके अलावा हमने आपको प्रवेश परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया के बारे में भी बताया। साथ ही साथ इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको बताया कि मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स का कोर्स करने के लिए कैंडिडेट में कितनी योग्यता होनी चाहिए और इसके लिए छात्रों को कितने रुपए तक की फीस का भुगतान करना होता है। 

इस लेख में हमने आपको यह जानकारी भी दी कि हमारे देश में कौन कौन से कॉलेजों या संस्थानों में यह डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है और वहां पर जो सब्जेक्ट्स स्टूडेंट्स को पढ़ाए जाते हैं उनके बारे में भी जानकारी दी। साथ ही हमने यह भी बताया कि जो कैंडिडेट सफलतापूर्वक अपना यह कोर्स पूरा कर लेते हैं तो उनके सामने फिर प्राइवेट और गवर्नमेंट सेक्टर में कैरियर की क्या संभावनाएं होती हैं। 

अंत में हमारा आपसे बस यही निवेदन है कि अगर आपको हमारा यह आर्टिकल हेल्पफुल लगा हो तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो12वीं के बाद मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स की फील्ड में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। 

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